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महक की कविताएँ (Hindi Edition)

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Management number 233719900 Release Date 2026/06/27 List Price $23.58 Model Number 233719900
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मेरे द्वारा रचित मेरा प्रथम काव्य संग्रह *महक की कविताएं* *मां भारती को समर्पित* मेरे द्वारा रचित काव्य संग्रह "महक की कविताएं"पुस्तक के माध्यम से मैंने अपने मन के भाव जन -जन तक पहुंचाने का सुगम विकल्प अपनाया है। मैंने अपनी कविता संग्रह में देशभक्ति की भरपूर झलक दिखाने का प्रयास किया है, जहां एक और व्यक्ति आज के भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं न कहीं मातृभूमि के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से विमुख होते जा रहे हैं, मेरे विचार से मातृभूमि से बढ़कर इंसान जगत का कोई दूसरा और फर्ज नहीं होता ।क्योंकि भारत की माटी पर जन्मा हर प्राणी स्वाभिमानी होता है जिसका परिचय , महाराणा प्रताप के स्वामिभक्त चेतक और गजराज रामप्रसाद के बिना इतिहास में परचम लहराना नामुमकिन था। ऐसे वीर महापराक्रमी महाराणा प्रताप को एकबार फिर याद करने की बात बताने की कोशिश करी हैं तो वही मेरा मन शीर्षक कविता हर एक के मन को झकझोर कर समाज में मोमबत्ती की बजाए मशालों को उठाने का संकेत देती हैं। तो साथ ही समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ महिलाओं को सशक्त कराने का भी संकेत करती हैं महिला स्वयं असीम शक्ति स्वरूपा है आज की महिला शांत है जब यह अपना रुद्र रूप धारण करेंगी तो पुरुष समाज इसे सहन नहीं कर पाएगा इस प्रकार महिलाओं को जागरूक करने की पहल की है, तो साथ ही प्रकृति का ख्याल रखते हुए दिन प्रतिदिन बढ़ते कारखानों से हमारी प्रकृति का भरपूर दोहन हो रहा है तो हमें वृक्ष लगाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देगा‌ और साथ ही साथ "नाविक हूं मैं सच्चा" तूफानों को चीर कर निकल जाऊंगा से तात्पर्य यह बताने का प्रयास किया है कि संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती और हमें हमारा आत्मविश्वास किन्ही भी परिस्थितियों में डगमगाना नहीं चाहिए। मेरा जीवन स्वयं काफी संघर्षपूर्ण रहा है अपितु फिर भी मैंने मेरी कविताओं में हार मानने जैसा कोई चिन्ह अंकित नहीं किया है "कहीं आग तो कहीं पानी है। यह तो जिंदगानी है हमने हार कहां मानी हैं", नामक कविता हमें संघर्ष के साथ चलते रहने को प्रेरित करती हैं तो साथ ही साथ वंदना और कुछ गीतों का भी मिश्रण किया है जो कि हृदय को आनंद देने वाले हैं, तो साथ ही कुछ मुक्तकों का भी संग्रह किया है ,जो हमें समय-समय पर हमारे काम आते हैं तो वहीं दूसरी ओर "मां तो स्वयं पूरा ब्रह्मांड "मां के विषय में भला कोई क्या लिख पाएगा। यह बताने की कोशिश करी है।तो वहीं बेटी को जितना भी रुदन कूटन , घाव दो सहनशील क्षमा दायिनी होती है बेटियां! मां की परछाई , पिता की आन भाइयों की सखा,तो पति का अभिमान होती है बेटियां। बताने का प्रयास किया है साथ ही साथ मेरी कविताओं में मैंने बड़े ही हर्ष के साथ यह बताने का प्रयास किया है कि बड़ी सौभाग्य से जन्म मिला इस पावन धरा पर सोच- सोच इठलाऊं! तेरी राह में दम निकले मेरा तिरंगा कफन ओढ़ कर जाऊं!भारत की भूमि पर जन्म मिलना ही बड़े गौरव की बात बताई है। तो देश में व्याप्त बेरोजगारी को मद्धे नजर रखते हुए आखिरकार कब तक बेरोजगार रहोगे काज कोई छोटा नहीं होता। के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को रोजगार के प्रति प्रेरित करती हैं। तो साथ ही साथयुवाओं को आह्वान करती हुई रचना जागो हे राष्ट्र की "युवा शक्ति" नव राष्ट्र का निर्माण करो आज का युवा मेरे भारत का भविष्य हैं अर्थात मुझे लगता है। कि एक बार महक की कविताएं जरूर पढ़नी चाहिए। और मुझे पूर्णतः विश्वास है कि मेरा काव्य संग्रह *महक की कविताएं* सभी सम्मानीय पाठकों को जरुर पसंद आएगी। और आप हमारा मार्गदर्शन भी जरुर करेंगे। सादर धन्यवाद! मधु सिंह महक प्रकाशक: आभिव्यक्ति साहित्य Tag: आभिव्यक्ति e-Publishing, यह पुस्तक अभिव्यक्ति साहित्य द्वारा संचालित कार्यक्रम “e-publishing by अभिव्यक्ति” द्वारा प्रकाशित की गई है। आप पाठकों में से कई पाठक ऐसे होंगे जो अपनी पुस्तक अपने विचार अपनी रचनाएं लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपकी भी पुस्तक प्रकाशित हो तो आप अभिव्यक्ति साहित्य से संपर्क कर सकते हैं। अभिव्यक्ति साहित्य से संपर्क करने के लिए आप नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कीजिए एवं अभिव्यक्ति साहित्य पर संदेश भेजिए। अभिव्यक्ति साहित्य : https://wa.link/idzlj3 Read more

ASIN B08TJ5PK6X
Language Hindi
File size 2.7 MB
Page Flip Enabled
Publisher अभिव्यक्ति साहित्य
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Print length 120 pages
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Publication date January 19, 2021
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